राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया का अखिल भारतीय अधिवेशन ख़त्म

देवबन्द - 25 मार्च 2015

      राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के अखिल भारतीय अधिवेशन में दारुल उलूम देवबन्द के हदीस के अध्यापक मौलाना अरशद मदनी ने इस्लामी मदरसों को आपसी अमन और भाईचारे का पैगाम देते हुए कहा कि देश की मौजूदा परिस्थितियों में मदरसों के जि़म्मेदारों को अपना धार्मिक और सामाजिक दायित्व पूरा करना चाहिये और देशबन्धुओं के बीच भाईचारे के पैगाम को आम करना चाहिये। अधिवेशन की दूसरी और अन्तिम बैठक में मौलाना अरशद मदनी ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि हमारा देश आजादी के बाद इस समय इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर खडा है जहां उसका संविधान और उसकी सैक्यूलर छवि खतरे में है। उन्होंने कहा कि मुल्क की सैक्यूलर रिवायात और उसका संविधान सभी देशवासियों विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को वजूद और तरक़्की की ज़मानत देता है। इसलिये आवश्यक है कि मदारिस के जि़म्मेदारान अपनी चारदीवारी से निकलें और देशवासियों के बीच खडी नफ़रत की दीवार को गिरा दें। मौलाना मदनी ने दारुल उलूम में अध्यापक शिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मदरसों के निज़ाम को कारगर बनाने के लिये अध्यापकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिये और दूसरे इस्लामी विषयों पर दक्ष लोगों को तैयार करना चाहिये।

      अधिवेशन की अन्तिम बैठक मस्जिद रशीद में मग़रिब की नमाज़ के बाद मोहतमिम दारुल उलूम मौलाना मुफ़्ती अबुल क़ासिम नौमानी की अध्यक्षता में हुई। उन्होंने अपने संक्षिप्त अभिभाषण में मदारिस को चेतावनी दी कि मौजूदा समय में देश के अन्दर मुसलमानों में ही कुछ ऐसे लोग हैं जो इस्लाम और उलमा को निशाना बना रहे हैं और कुछ मुस्लिम इदारों के प्लेटफ़ार्म से इस्लाम विरोधी चिन्तन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने जोर दिया किया कि सकारात्मक और असरदार अन्दाज़ में ऐसी कोशिशों को नाकाम कर देना चाहिये।

      तहफ़्फ़ुज़ ख़त्मे नबुव्वत विभाग के नाजि़म और हदीस के अध्यापक मौलाना कारी मुहम्मद उस्मान मन्सूरपुरी ने तहफ़्फ़ुज़ ख़त्मे नबुव्वत के विषय पर बैठक को संबोधित करते हुए कि हज़रत मुहम्मद (सल0) के अन्तिम नबी होने का विश्वास पवित्र कुरआन की सौ से अधिक आयात और सैकडों हदीसों से साबित है। इस विश्वास को लोगों में सकारात्मक अन्दाज में पेश करने की आवश्यकता है। उन्हांेने इस सिलसिले में मदारिस को अपना दायित्व निभाने की ताकीद करते हुए कहा कि सभी मदरसों के जि़म्मेदारान को इस समस्या की ओर ध्यान देना चाहिये।

      मदरसा रहीमिया बांडीपुरा कश्मीर के मोहतमिम और शूरा सदस्य मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी ने सीघे सादे मुसलमानों को बहकाने वाली इसलाम-दुशमन ताकतों की बढती हुई सरगर्मियों पर नज़र रखने और मुनासिब अन्दाज़ में उनका मुकाबला करने पर जोर दिया।

      दारुल उलूम देवबन्द में हदीस के अध्यापक मौलाना हबीबुर्रहमान आज़मी ने कहा कि नबी के वारिस उलमा दीन और इस्लामी मदारिस को मुखालिफ़ हालात से घबराना नहीं चाहिये क्योंकि यह उनकी खुदा के यहां कुबूलियत की दलील है।

      राबता मदारिस इस्लामिया के अखिल भारतीय अधिवेशन में मदारिस की शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय और सामाजिक हालात के मद्देनज़र अहम प्रस्ताव पारित किये गये। दारुल उलूम के अध्यापक मौलाना मुहम्मद सलमान बिजनौरी ने मौजूदा हालात में मदारिस के सामने आने वाली समस्याओं और उनके समाधान के बारे में प्रस्ताव प्रस्तुत किया और ध्यान दिलाया कि हतोत्साहित और उत्तेजित होकर नकारात्मक दृष्टिकोण ना अपनायें। शिक्षा व्यवस्था के स्तर और मदरसों की भीतरी व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने संबंधी प्रस्ताव पेश करते हुए मदरसा शाही मुरादाबाद के मौलाना शब्बीर अहमद क़ासमी ने मदरसों के निज़ाम को उत्तम बनाने और आय-व्यय को शरीयत और कानूनी पहलुओं के अनुसार पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।

      दारुल उलूम देवबन्द के मुफ़्ती ज़ैनुल इस्लाम कासमी ने समाज सुधार संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मौलाना मतीनुल हक़ उसामा कानपुरी ने देश के दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले मुसलमानों के बीच चलने वाली गैर इस्लामी और बातिल फिरकों की सरगर्मियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से मुनासिब अन्दाज में मुकाबला करना चाहिये। मौलाना अब्दुल्लाह मारूफ़ी उस्ताद हदीस दारुल उलूम देवबन्द ने भी देश के विभिन्न भागों में जारी इस्लाम विरोधी मुहिमों की जानकारी और उनका मुकाबला करने के संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत किया और इसके लिये एक व्यापक कार्यक्रम बनाने पर जोर दिया।

      अन्त में नाजिम अखिल भारतीय राबता मदारिस मौलाना शौकत अली ने ताज़यती तजवीज़ पेश की और कुछ समय पूर्व इन्तक़ाल करने वाली अहम शखि़्सयात को श्रद्धांजली अर्पित की और उनकी मग़फिरत की दुआ की। प्रस्तुत किये जाने वाले सभी प्रस्तावों को अधिवेशन में भाग लेने वाले सभी लोगों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया और कुछ दूसरे लोगों ने अनुमोदन भी किया जिनमें मुफ़्ती सलमान मन्सूरपुरी उस्ताद मदरसा शाही मुरादाबाद, मौलाना ग़यासुद््दीन हैदराबाद, मुफ़्ती सिराजुद्दीन मणिपुर, मौलाना जमील अहमद मुज़फ़्फ़रनगर,, मौलाना अहमदुद्ीन राजस्थानी आदि शामिल हैं।

      राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के अधिवेशन की दूसरी और अन्तिम बैठक में संचालन का भार राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया के नाजि़म मौलाना शौकत अली कासमी ने उठाया और बैठक की शुरूआत क़ारी मुहम्मद आफ़ताब अमरोहवी की किरअ़त से हुआ।

      राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया का यह शानदार अधिवेशन दारुल उलूम देवबन्द के सदर मुदर्रिस मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद पालनपुरी की दुआ के साथ समाप्त हुआ। इस अधिवेशन में दारुल उलूम देवबन्द की शूरा के सदस्य, दारुल उलूम देवबन्द के अध्यापकगण के अलावा मजलिस आमला राबता के सदस्यों, प्रांतीय अध्यक्षों  और जि़म्मेदारों ने शिरकत की।

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नशर व इशाअत कमेटी राबता मदारिस इस्लामिया अरबिया

दारुल उलूम देवबन्द

 
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